नीता अनामिका II छल कपट के चौसर परपासे गए सब सजचले वचनबद्ध रामराज-पाट सब तज… वर्ष चौदह...
काव्य कौमुदी
जीवन बस चलता जाता है
जब घोर उदासी छा जायें , सारे सपनें मुरझा जायें , अंतर्मन घायल हो जायें , जब होश हमारा खो जायें ...
मनस्वी अपर्णा की ताजा गज़लें
मनस्वी अपर्णा II १२१२ ११२२ १२१२ ११२/२२ये सिलसिला भी कहां बार बार होता...
प्रत्यंचा
उर्वशी भट्ट।। मैं नहीं जानती हूँसहनशीलता शब्द से तुम्हारेसभ्य समाज केसंदर्भित अर्थ क्या हैं? मैं...
मैं आधुनिक भारत हूँ
रश्मि सिन्हा II मैं आधुनिक भारत हूँ,नित नई समस्याओं से भरा हुआ,गगनचुम्बी है, आधुनिकता मेरी,पर...
सूफिया ज़ैदी की ग़ज़लें
सूफिया ज़ैदी II इधर पड़े हैं खंजर तो आरी कहाँ है,वतन की खातिर अब ज़िम्मेदारी कहाँ है। फैला है इस.कदर...
क्षणिकाएँ
बुशरा तबस्सुम II ।। 1।।सुनो मितराआजकल नापती हूँ राततो इंच दर इंचसटीक होती है पैमाईश,सरलता से हाथ आ...
देश के पत्रकार
मृदुला घई II इस देश के पत्रकार हैं हमनव युग के चित्रकार हैं हमनये दौर के आगाज़ हैं हमहर इन्सान की...
पूर्वज पाँव
प्रेम शंकर शुक्ल II मानव इतिहास कहता है कि मनुष्य पहलेचार पाँव का था अर्थात चौपाया आगे जाकर दो पाँव...
एक ग़ज़ल …..
अंजुम बदायुनी II मशीख़तों को फ़रोग़ देना नहीं है हुस्ने – विक़ार मेरान इतनी हल्की...
खाट के नियम
डॉ अनीता सिंह II वह बुनता जातागिनता जाताइं चं जम(यम) राजये कैसी गिनती हैकैसा पहाड़ाकिसी स्कूल मेंन...
कलाइयों पर ज़ोर देकर
मंजुल सिंह II लोगइतने सारे लोगजैसे लगा होलोगों का बाजारजहां ख़रीदे और बेचेजाते हैं लोगकुछ बेबस,कुछ...
