डॉ उर्वशी भट्ट II तुम्हारे सामीप्य से जितना भी अर्जित कर पायीवह श्लाघनीय है मेरे जीवनमैं जहाँ...
काव्य कौमुदी
याद तुम्हारी आई है माँ
शिवांकित तिवारी “शिवा” II मेरा दिल जब-जब घबराया, याद तुम्हारी आई है माँ, जब-जब है...
तेरी ख़ामोशियां
चिराग इंडिया II तेरी ख़ामोशियां दिलबर मेरा दिल तोड़ देती हैंतेरी जानिब बढ़े क़दमों को अक्सर मोड़...
मैं एवं दीपावली (सोनेट)
अनिमा दास II न लाँघ पाऊँ में सौमित्र की तृतीय रेखा…किंतु हूँ प्रतिज्ञाबद्धमैं दूँगी अग्नि...
स्त्रियोचित होना नैसर्गिक है क्या?
राज गोपाल सिंह वर्मा II एक विचारक ने कहा था,‘स्त्री पैदा होती नहीं…बनाई जाती...
झूठ
डिम्पल राठौर II झूठ॰॰॰जो झूठ केप्रशंसक होते हैंवे सत्य से सदैवआँखें चुराते हैं॰॰॰झूठआत्मा पर...
प्रेम तुमसे सनातन हमारा प्रिये!
सुभाष चंद्र मिश्र ।।प्रेम तुमसे सनातन हमारा ...
गुरु नानकदेव जी को समर्पित कुछ दोहे
ताराचंद शर्मा ‘नादान’ II नीति नियम ना जाणदा, माफ़ करीं हर भूल।सतगुरु नानक देव दे, चरणां...
श्याम सपनों में मेरे भी आए सखी
नरेश शांडिल्य II श्याम सपनों में मेरे भी आए सखीकोई राधा को जाकर बताए सखी… उनकी मुरली मेरे भी जिगर...
भूख
कुलदीप सिंह भाटी II मानव के दु:ख हमेशा से हीउल्लेखनीय विषय रहे हैं कविताओं के।भूख कुछ इन्हीं विषयों...
जुदा हो जाएं हम क्यूं तल्खियों को तूल दें
मनस्वी अपर्णा II (एक)२१२२ २१२२ २१२२ २१२हौसलों का क्या करेंगे जब सलामत सर नहींकैसे ले परवाज़ वो पंछी...
फटी हुई सबकी जाजम है
डॉ. अतुल चतुर्वेदी II भीगी यादों का मौसम है,बस्ती में पसरा मातम है। मजबूरी है तुम कहते हो,उनका तो...
