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स्वर कोकिला लता मंगेशकर का निधन

फोटो: साभार गूगल

अश्रुत पूर्वा II

नई दिल्ली। एक पुरसुकून आवाज पानियों में गुम हो गया। नीला आसमान सो गया है उनके जाने से। मगर सच तो यह है कि चाशनी सी अविरल धुन में लता जी का स्वर हवाओं में सदियों तक गूंजता रहेगा। वे बरसों-बरस हम सबके दिलों में रहेंगी। हर भारतीय नारी के कंठ में वे विराजमान रहेंगी। इस समय पूरा देश शोक में डूबा है क्योंकि अपनी सुरीली आवाज से पूरी दुनिया को मोहित कर लेने वाली महान गायिका लता मंगेशकर हम सबको छोड़ कर चली गई हैं। हिंदी सिनेमा और संगीत की दुनिया में तो ऐसी कोई चोटी की हीरोइन और संगीतकार नहीं (ओपी नैयर को छोड़ कर) जो लता जी से न जुड़ा हो।

गायिका और बहन उषा मंगेशकर के मुताबिक लता जी के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। वे कोरोना से संक्रमित पाई गई थीं। उन्हें बीमारी के मामूली लक्षण थे। आठ जनवरी को उन्हें ब्रीच कैंडी अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती कराया गया था। वे दो हफ्ते से अधिक समय तक सघन चिकित्सा कक्ष में रहीं। इसके बाद उनकी तबीयत थोड़ी सुधरी थी। बीती 28 जनवरी को जीवन रक्षक प्रणाली हटा दी गई थीं। मगर पांच फरवरी से उनका स्वास्थ्य फिर बिगड़ने लगा, जिसके बाद उन्हें फिर से वेंटिलेटर पर रखा गया था।

लता मंगेशकर के निधन पर दो दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है। इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा।  लता जी के निधन के बाद पूरा देश शोक की लहर में डूब गया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई हस्तियों ने उनके निधन पर गहरा शोक जताया है। राष्ट्रपति भवन ने श्री कोविंद के हवाले से ट्वीट किया है, ‘लता दीदी जैसा कलाकार सदियों में एक बार पैदा होता है। वह एक असाधारण व्यक्ति थीं, जो उच्च कोटि के व्यवहार की धनी थीं।’ उन्होंने कहा कि यह दिव्य आवाज सदा के लिए बंद हो गई लेकिन उनके गाए गीत हमेशा अमर रहेंगे और अनंतकाल तक गूंजते रहेंगे।

1949 में फिल्म महल का मशहूर गीत ‘आएगा आएगा आने वाला’ के बाद लता मंगेशकर को सही मायने में पहचान मिली। खेमचंद प्रकाशा इस फिल्म के संगीतकार थे। उसके बाद लता जी के स्वर ऐसे गूंजे कि आज तक गूंज रहे हैं।

स्वर कोकिला लता मंगेशकर के साथ अपने चित्र साझा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत रत्न लता जी की उपलब्धियां अतुलनीय हैं। राष्ट्रपति ने उनके साथ अपनी मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि लता दीदी एक विलक्षण व्यक्तित्व थीं और उनके जैसे कलाकार सदियों में एक बार ही जन्म लेते हैं। वे जब भी लता दीदी से मिले, उन्हें गर्मजोशी से भरा पाया।  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘यह मेरे लिए सम्मान की बात है कि मुझे लता दीदी से हमेशा बहुत स्नेह मिला। मैं उनके साथ की गई बातों को हमेशा याद रखूंगा। मैं और देशवासी लता दीदी के निधन पर शोक व्यक्त करते हैं। मैंने उनके परिवार से बात की और अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। ओम शांति।’

जिस फिल्म ने भारतीय सिनेमा संगीत को एक नया मोड़ दिया था वह थी शंकर जयकिशन की राज कपूर द्वारा बनाई गई ‘बरसात’। ‘जिया बेकरार है…’, ‘हवा में उड़ता जाए मोरा लाल दुपट्टा मलमल का…’, ‘छोड़ गए बालम…’, ‘बरसात में हम से मिले तुम…’ जैसे गानों ने अपार लोकप्रियता हासिल की और लता मंगेशकर राज कपूर की फिल्मों का अहम हिस्सा हो गई। ‘आवारा’, ‘आह’, ‘श्री 420’, ‘जिस देश में गंगा बहती है’, ‘संगम’ जैसी फिल्म तक राज कपूर ने लता मंगेशकर से गवाया।

स्वर सम्राज्ञी लता मंगेशकर ने पांच साल की उम्र से गायन का प्रशिक्षण लेना शुरू किया था। उन्होंने 1942 में एक गायिका के रूप में अपना करियर शुरू किया था और सात दशकों से अधिक समय तक हिंदी, मराठी, तमिल, कन्नड़ और बंगाली समेत 36 भारतीय भाषाओं में लगभग 25 हजार गीत गाए। भारतीय सिनेमा के महान पार्श्व गायकों में से एक लता मंगेशकर को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्हें पद्मभूषण, पद्मविभूषण, दादा साहेब फाल्के पुरस्कार और कई बार फिल्म पुरस्कारों से नवाजा गया। उन्हें 2001 में भारत का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान भारत रत्न दिया गया था। (एजंसी इनपुट)

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