विनीत मोहन ‘फ़िक्र’ सागरी II लौट आयी जाँ मेरी, तेरी ख़बर आने के बाद,मुस्कुरायी है फ़िज़ां...
काव्य कौमुदी
नदियां बनाम बहनें
वीणा कुमारी ll जाड़े की ठिठुरन के बीचजैसे ही धूप आँगन में पांव पसारतीअम्मा जल्दी जल्दी काम...
सभ्यताएँ
कुलदीप सिंह भाटी II पहले जहाँनदियों के किनारे होती थी विकसितसभ्यताएँ हमारीवहीं अबनदियों को किनारे...
जलियांवाला बाग में बसंत
सुभद्रा कुमारी चौहान II यहां कोकिला नहीं, काग हैं, शोर मचाते,काले काले कीट, भ्रमर का भ्रम...
हस्तक्षेप
श्रीकांत वर्मा II कोई छींकता तक नहींइस डर सेकि मगध की शांतिभंग न हो जाय,मगध को बनाए रखना है,तो, मगध...
मैं कहाँ?
डॉ॰ सुमन सचदेवा II कहा उसनेबहुत प्यार है तुमसेमगर अपनी ज़रूरत,फ़ुर्सत व इच्छा से हीकर पाए इज़हार...
मैं आऊंगा
संजय स्वतंत्र II मैं आऊंगा –अधूरे ख्वाबों कोपूरा करने औरतुम्हारे चेहरे कोबना दूंगा...
प्रेम
ज्योतिष जोषी II प्रेमअपने मेंहोने की खोज हैया कहीं खो गए अधूरे मन कीपूर्णता का अनवरत अधीर प्रयत्नजो...
विदा
ज्योतिष जोशी II पौ फटने के पहलेकहा बिछली घास पर पसरी ओस नेविदाकहा पखेरुओं ने पीपल की झुकी शाख पर...
धुंधली – सी छाया
ज्योतिष जोषी II कभी पास से देखिएमंडराती हैं छायाएं आपके आसपासउनके धुंधले रूप चकित करते हैंजब वे...
शमशेर बहादुर सिंह की कविता चुका भी हूं मैं नहीं
शमशेर बहादुर सिंह II चुका भी हूं मैं नहींकहां किया मैंने प्रेमअभी। जब करूंगा प्रेमपिघल उठेंगेयुगों...
विजया सिंह की कविताएं
विजया सिंह II मच्छर मच्छर सुन्दर संगीत का वाहक हैएक उड़ता हुआ गवैयाजो अपने पंखों से मधुर संगीत...
