मनस्वी अपर्णा II आज मिला है मौका तो फिर लाजिÞम है जज्बात लिखूंबोलो तो झूठा सच लिख दूं या फिर अपनी...
काव्य कौमुदी
तेलुगु लेखिका नागमणि मालिरेड्डी की अंग्रेजी कविता
Nagmani Malireddy II A bird in a cageNever I like the ideaOf keeping a bird in a cageFor me...
मम्मा समझा करो…
अमनदीप गुजराल ‘विम्मी’ II खुद से हारी होती है जबचली आती है खिसियाई सीआते ही झगड़ पड़ती है बिना...
लुटा के बैठे तो तेरी बिसात को समझे
मनस्वी अर्पणा II १२१२ ११२२ १२१२ ११२/२२खुदाई समझे, खुदा तेरी जात को समझेहुआ जब इश्क तो हम कायनात को...
जज्बात मेरे मौसम के रंग में ढलते हैं
मनस्वी अपर्णा II २२१ १२२२ २२१ १२२२इक आंच में उल्फत की दो जिस्म पिघलते हैंहम...
1. श्रावण की शुष्कता (सॉनेट )
विनीत मोहन ‘औदिच्य’ II नैराश्य की हाला अंतस में जब प्राणों तक भर जाती हैश्रावण की...
प्रेम का लैम्प पोस्ट
संजय स्वतंत्र II सागर की उफनती लहरों कोछूकर मैंने उस दिनरच दिया था तुम्हारे ललाट परएक जल-बिंदु...
दिल में प्यार रखता हूँ
शिवम द्विवेदी ‘सहर’ II कलम कहते हैं जिसको मैं भी वो तलवार रखता हूँमैं ज़ालिम...
स्त्री के जीवन में आई स्त्रियाँ
प्रिया वर्मा II एक कहती बड़ा गीला मन है तुम्हाराएक कहती अपने लिए वक़्त निकालोएक कहती कहीं भाग क्यों...
जाने ये कैसा जमाने का असर लगता है
विनीत मोहन_फ़िक्र सागरी II जाने ये कैसा जमाने का असर लगता हैआज इंसान को इंसान से डर लगता है। मेरी...
एक दिन मैं खुद को खत लिखूंगी
अमनदीप ‘विम्मी’ II एक दिन मैं खुद को खत लिखूंगीज़माने भर के नकारासिद्ध करने के बावजूदजताऊंगी खुद पर...
पाश
उर्वशी भट्ट II आसक्ति के पाश की जकड़ इतनी घातक होती है, किदेह चूक जाती है सारा सामर्थ्यचेहरा ज़र्द...
