अश्रुतपूर्वा II जो तुम आ जाते एक बारकितनी करुणा कितने संदेशपथ में बिछ जाते बन परागगाता प्राणों का...
काव्य कौमुदी
जब कभी पूर्व प्रेमिका से मिलना
अमनदीप गुजराल II जब कभी पूर्व प्रेमिका से मिलनाउसे महसूस मत होने देनाअपना अकेलापन… न ही जताना...
चाँद की चिकोटी
ऊर्वशी घनश्याम II कच्ची पक्की पगडंडियांहुलस के गले मिलीराह चलतेढेरों बातेंसर्द तल्खियांदांतों तले...
स्त्री!
डॉ. मंजुला चौधरी II स्त्री!तुम अपने आस-पास पसरे वर्जनाओं के जाल में क्यों उलझती हो,जबकि हमेशा टूटती...
जब मेरी कविता तुम्हारे पास आएगी
राकेश धर द्विवेदी II मेरी मृत्यु के पश्चाततुम्हारे पास आएंगीमेरी कविताएं।तुम्हें रुलाएंगी, तुम्हें...
आज अपना सच बताना है मुझे
मनस्वी अपर्णा II मैं हूं औरत! आज अपना सच बताना है मुझेमेंहदी की मानिंद पिस के रंग लाना है मुझे...
मैं लखनऊ हूं
राकेश धर द्विवेदी II मैं निकलता हूं जबलखनऊ स्टेशन के बाहर,सामने लिखा देखता हूं-मुस्कुराइए कि आप...
मुझे भगवान मिल गए
एक सुबह निकल पड़ता हूंकार्यालय के लिए,दौड़ कर मेट्रो पकड़ता हूंऔर सीट पर बैठने काप्रयास करता हूं...
मां एक बात बतलाओ ना
राकेश धर द्विवेदी II कोयल अब कूं-कूं नहीं करतीगौरेया भी नहीं फुदकती दिखतीन ही सुनाई देतीमैना की...
भूल जाती हूँ सारे ग़म
वीणा कुमारी II जब पेड़ के पत्तों सेटप टप टपकती हैबारिश की बूंदेंतो निहारती रहती हूं उसेऔर भूल जाती...
जब समय मिले
केदारनाथ सिंह II आनाजब समय मिलेजब समय न मिलेतब भी आना आनाजैसे हाथों मेंआता है जांगरजैसे धमनियों...
मां बताती रही हमेशा
अमनदीप ‘विम्मी’ II जवान होने पर मां मुझ पर कड़ी नजर रखती थीवो नहीं चाहती थी किमैं देखूं गुलाब...
