मंजुल सिंह II लोगइतने सारे लोगजैसे लगा होलोगों का बाजारजहां ख़रीदे और बेचेजाते हैं लोगकुछ बेबस,कुछ...
कविताएं
मैं स्वर हूँ
सांत्वना श्रीकांत II मैं शंखनाद सेनिकली गूंज हूं,रहूंगी देर तक कानों में।तुम्हारे...
मौन का वजूद
अनुपमा झा II हर काल मेंमौन को किया गया परिभाषित,अपने तरीके सेअपनी सुविधानुसार।मौन को कभीओढ़ा दिया...
अबकी बार जो मिलोगे
सांत्वना श्रीकान्त II मेरी भाषा अलग हैतुम्हारी भाषा अलग है,जम्मू से आती हुईगद्दी जनजातियों की...
पवन कुमार वैष्णव की 3 कविताएं
1.एक आदमी को जानता हूँ।हम कविताएँ नहीं पढ़ते बल्कि एक ऐसे आदमी को पढ़ते हैंजो व्यथित होकरसुख से...
सच बतलाना शिव
पल्लवी मिश्रा II सच बतलाना शिवबांधा था तुमने जबअपनी जटाओं मेंगंगा की अविरल धारउस स्निग्ध बंधन...
तुम पर मेरी कविता…..
अजय कुमार II उसने कहामुझ पर एक कविता लिखोमैंने कहा पहलेअपने बेरहम ख्वाबों की ऊंचीनीली छत से...
मैं पिता हो जाना चाहता हूं
संजय स्वतंत्र II तुम्हारे लिए अबपिता हो जाना चाहता हूं,जिसकी अंगुलियां पकड़चल सको कहीं भीऔर मैं...
मत पूछो कौन हूँ मैं ?
विनीत मोहन औदिच्य II अनुत्तरित रहा है यह शाश्वत प्रश्नपूछता रहा हूँ स्वयं से, कौन हूँ मैं ???मिथ्या...
धूप (भाग -१ )
लिली मित्रा II आसमान कुछ नही कहता,पेड़ कुछ नही कहते,तार पर गदराया बैठा पंक्षी युगल भी कुछ नही...
व्यथा
अनिमा दास II मैं नहीं ठहरती समीर की सीमाओं मेंन मैं बुझती सागर की क्षुधा मेंमैं नग्न रेणु सी उड़...
और नदी बहती रही
राजेश्वर वशिष्ठ II नदी में नाव खेते हुए मल्लाह को अक्सर लगता था कि वह अपने चप्पू से नाव को नहीं नदी...
